आखिर ऐसा क्यों ? एक समान और उपयोगी शिक्षण -प्रशिक्षण क्यों ? - आशा संगठान

मैकोले जो एक ब्रिटिश अधिकारी था। उसने 1835 हमारे देश मे शिक्षा व्यवस्था की शुरुआत की।

क्या कोई अपने गुलाम को ऐसी शिक्षा देना चाहेगा कि वह बौद्धिक ,शारीरिक और आर्थिक रुप से मजबूत हो जाये? नहीं। उसकी पूरी कोशिश होगी कि वह बौद्धिक ,शारीरिक और आर्थिक रुप से कमजोर रहे। यहाँ तक की वह मानसिक रुप से भी गुलाम हो जाये। क्या हमारी शिक्षा ब्यवस्थ मे इन्हीं गुणों का समावेश नहीं है ? बेरोजगारी देश के प्रति गद्दारी असमानता नैतिक ह्रास सम्प्रादायिकता,उप्भोकतावादी संस्कृति आदि उसी शिक्षा का परिणाम है



हमारी सरकारें जानबूझ कर उन पद्वतियो/ कानूनों को आज भी चला रही है जिससे आपका बौद्धिक /आर्थिक विकास ना हो सके। यथार्थ मे सन् 47 मे सिर्फ सत्ता का हस्तान्तरण हुआ था,आजादी अभी बाकी है ।तब आप अंग्रेज़ों के गुलाम थे आज आप अपनो (इन्डियनों) के।।

गांधी जी ने भी मैकोले शिक्षा पद्धति का विरोध किया था। उन्होंने कहा था। कि ये पद्धति गुलाम बनाने वाला है वे श्रम पर आधारित शिक्षा चाहते थे उनके अनुसार सैद्वान्तिक शिक्षा सिर्फ 2 घंटे की और काम सिखाने वाली शिक्षा घंटे की चाहते थे लेकिन उनकी बात को भी सरकारें आज तक नजर अंदाज कर रही है

किताबें अलग, शिक्षक की योग्यता अलग, स्कूल की ब्यवस्था अलग, शैक्षणिक वातावरण एवं पाठ्यक्रम भी अलग, परन्तु परीक्षा सबके लिये परीक्षा एक समान?



हमारे देश मे सैकड़ों शैक्षणिक बोर्ड कौंसिल तथा विश्वविद्यालय चल रहे है अलग -अलग संस्थानो के शैक्षणिक सामग्रियों एवं ब्यवस्थाओं मे इतना बड़ा अन्तर होता है एक बोर्ड के दसवीं पास विध्यार्थी की योग्यता किसी दूसरी बोर्ड के दूसरी कक्षा के योग्यता से भी कम है ।शिक्षकों की चयन प्रक्रिया ,योग्यता तथा गुणवत्ता में जमीन-आसमान का अन्तर होता है समान कक्षा के पाठ्य सामग्रियों में भी दो बोर्डों या विश्वविद्यालयों के बीच काफी अन्तर होता है परन्तु प्रतियोगिता (क्लर्क से कलेक्टर तक) सबके लिये एक ही होता है प्रोफेशनल जीवन में भी सबसे समान कार्यक्षमता की अपेक्षा की जाती है



आखिर ऐसा क्यों ? जब जीवन की वास्तविकता में प्रवेश एवं प्रतियोगिता परीक्षा मे ,साक्षात्कार में सबसे   समान स्तर के सवाल पूछे जाते है ,सबसे समान उत्कृष्टता की उम्मीद की जाती है तो सबको एक समान और उपयोगी शिक्षण -प्रशिक्षण क्यों नहीं दिया जाता? क्या यह उन लाखों विध्यार्थियों के साथ साजिश नहीं है ? जिन्हें गुणवत्ता पूर्वक अव्यतन (updates) शिक्षा नहीं दी जाती - आम आवाज शक्तिवर्धन अभियान (आशा)!  आशा संगठान

चलो आशा के सा
  (   रवि पाल )
9911175879
9761880779 (Whats App)

For More Details Visit Our Facebook Page : https://www.facebook.com/aashasangathan/

Popular posts from this blog

राजनेताओं गन्दी राजनीति करना बन्द करों

हमारा कोई मक्सद नहीं था। कि इस अभियान को शुरू किया जाये । क्यों जरूरत पड़ गयी इस अभियान को शुरू करने की?