हमारा कोई मक्सद नहीं था। कि इस अभियान को शुरू किया जाये । क्यों जरूरत पड़ गयी इस अभियान को शुरू करने की?

भारत देश को आजादी मिले 70 साल हो चुके है । यदि हम भारत देश को अपनी नजरों से देखें तो भारत में आपको कुछ अलग ही नजारा दिखाई देगा।" भारत कैसा है ? "
            जैसा कि आप लोग जानते है हमारी सरकार पूरे 10 सालों में देश का एक सर्वेक्षण कराती है इसको हम जनगणना कहते है
             हमारे भारत देश में एक बहुत बड़े अर्थशास्त्री हुए जिनका नाम अर्जुन सेन गुप्ता है जिन्होंने ( अर्जुन सेन गुप्ता और उनकी टीम) ने 5 वर्षों तक अध्यन किया और एक रिपोर्ट बनायी।


    अर्जुन सेन गुप्ता कमीशन रिपोर्ट
            (  2009 की घटना)
(1) 2009 मे हिन्दुस्तान की आबादी 115 करोड़ है । उसमें से 84 करोड़ लोग अत्यन्त गरीब है । रिपोर्ट बताती है एक ब्यक्ति को 1 दिन में खर्च करने के लिये 20 रुपये भी नहीं है ।
(2) 84 करोड़ लोगों में से ,20 करोड़  लोग तो ऐसे है जो एक दिन में 5 रुपये भी खर्च नहीं कर सकते। और  15 से 16 करोड़ लोग ऐसे है जो एक दिन में 9 रुपये खर्च नहीं कर सकते।
(3) 40 करोड़ लोग ऐसे है जिनको साल में 2-4 महीने काम मिल जाता है लेबर ,मजदूरी कर लेते है ।
           1951में,आजादी के बाद जब सरकार ने पहली बार सर्वेक्षण कराया था। उस समय भारत की कुल आबादी 34 करोड़ थी । और उन 34 करोड़ की आबादी में 4 करोड़ लोग बेरोजगार, गरीब थे । 2009 मे भारत की कुल आबादी 115 करोड़ ।
  34 करोड़ आबादी  =4 करोड़ बेरोजगार
115 करोड़ आबादी =84 करोड़ बेरोजगार कैसे?
 यदि आबादी ग्रोथ  4%(लगभग ) तो बेरोजगारी भी 4% ही ग्रोथ होना चाहिए  ।लेकिन बेरोजगारी ग्रोथ( 20 % to 21%) इसका मतलब साफ है सिस्टम भ्रष्ट है ।
                         ये है आजाद भारत की  तस्वीर ।। ये तस्वीर 2009 की है तो आज 2017 भारत की गरीबी ,भुखमरी ,बेरोजगारी की तस्वीर  कैसी होगी। ये आप अच्छी तरह सोच सकते है
          हिन्दुस्तान में सिर्फ 3-4 करोड़ लोग ही ऐसे है जो नागरिक की हैसियत से जीवन बिताते है । 80-90 लोगों ऐसे है जो अपनी पत्नी को  प्लेन  गिफ्ट कर सकते है । 
      90-95 करोड़ लोगो का दलदल में फसा हुआ हिन्दुस्तान है। क्या  ये लोग भारतवासी नहीं है ? सरकारें क्यों इनके साथ अन्याय करतीं आ रहीं है ।ये ऐसे लोग है जो सुबह पेट भर खा लेते  है। तो शाम का भरोसा नहीं। और शाम को पेट भर खा लेते तो सुबह का भरोसा नहीं ।

  भारत देश का सिस्टम
हमारे देश के राजनेता ,जिन्दगी में जिन्होने चाय तक नहीं बेकी,उनके पास हजारों करोड़ रुपये कहाँ से आये?
जिन्होने जिन्दगी में परचून की दुकान भी नहीं चलायी,उनके पास हजारो करोड़ रुपये कहाँ से आये?
जिन राजनेताओं के घर में ना कोशिश बिजनेस है और ना कोई  नौकरी,उनके पास अरबों रुपये कहाँ से आये।इसका मतलब सिस्टम लीक है सिस्टम भ्रष्ट है ।

हमारा सिस्टम भ्रष्ट है

हमारे देश में राजनेताओं ( विधायक से लेकर प्रधानमंत्री तक) पर करोड़ों ,अरबों रुपये खर्च किये जाते है ।राजनेताओं को सरकारी घर चाहिए ,सरकारी गाड़ी चाहिए ,बंगला सरकारी चाहिए यहाँ तक उनकी शुरक्षा के लिये करोड़ों रुपये खर्च किये जाते है । लेकिन क्यों ? किसी के पास भी इसका जबाव नहीं है ।जब हिन्दुस्तान में 84 करोड़ लोग एक दिन में 20 रुपये खर्च नहीं कर सकत‍ा तो र‍ाजनेताओं पर इतना खर्चों क्यों ?

          क्यों राजनेताओं को z सिक्योरिटी चाहिए ?
  यदि राजनेताओं को मरने का इतना ही डर है ,तो राजनीति में क्यों आये?घर मे बैठें। यदि इतना रिस्क नहीं ले सकते तो किसने कहा था, कि राजनीति में आयें ?  मेरा तो यह मानना है । यदि इन नेताओं ने किसी का कुछ बिगाड़ा नहीं तो मरने का डर क्यों ?
        जो फालतू के खर्चे नेताओं पर खर्च हो रहे है उनको शिक्षा पर खर्च करने लगे तो हर गरीब  के बच्चे बिना पैसे दिये पढ़ाई कर सकते है और इन्जीनियर,डाक्टर. . .etc बन सकता है।

       मै चाहता हूँ इस देश का विधायक ,सांसद ,मंत्री वैसे ही रहें जैसा इस देश का आम इन्सान रहता है । वो करोड़पतियों के प्रतिनिधि नहीं है । वो आम आदमी के प्रतिनिधि है ।

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