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Showing posts from November, 2017

क्यों राजनेताओं को z सिक्योरिटी चाहिए ?

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यदि राजनेताओं को मरने का इतना ही डर है ,तो राजनीति में क्यों आये?घर मे बैठें। यदि इतना रिस्क नहीं ले सकते तो किसने कहा था, कि राजनीति में आयें ? मेरा तो यह मानना है । यदि इन नेताओं ने किसी का कुछ बिगाड़ा नहीं तो मरने का डर क्यों ?



जो फालतू के खर्चे नेताओं पर खर्च हो रहे है उनको शिक्षा पर खर्च करने लगे तो हर गरीब के बच्चे बिना पैसे दिये पढ़ाई कर सकते है और इन्जीनियर,डाक्टर. . .etc बन सकता है। मै चाहता हूँ इस देश का विधायक ,सांसद ,मंत्री वैसे ही रहें जैसा इस देश का आम इन्सान रहता है । वो करोड़पतियों के प्रतिनिधि नहीं है । वो आम आदमी के प्रतिनिधि है । " आम आवाज शक्तिवर्धन अभियान " (AASHA) नाम से एक सामाजिक -राजनैतिक संगठन का निर्माण हुआ है । जिसका उद्देश्य सामाजिक- राजनैतिक बुराइयों को समाप्त कर एक समतामूलक देश का निर्माण करना है ।ताकि हर भारतीय को समान अवसर एवम्‌ सम्मान मिल सके। राजनीति में अयोग्य तथा अपराधी प्रवृत्ति के ब्यवक्तियों का प्रवेश रोकना भी है । ताकि सच्चे देशभक्त ,समाज सेवी,योग्य लोगों को राजनीति आकर्षित कर सके। संगठन अपने अनेक कार्यक्रमों में से एक अति महत्वपूर्…

अशिक्षित होने से बहुत ज्यादा खतरनाक है ,गलत शिक्षित होना।। - Ravi Pal (9761880779)

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हम केवल अशिक्षा के ही शिकार नहीं है बल्कि ,नकारात्मक एंव निरुपयोगी शिक्षा के भी शिकार है ।और यह अशिक्षित होने से ज्यादा खतरनाक है ।
हमारे अशिक्षित लोग भूखे ,नंगे है ,बीमार ,बेक‍ार है । ये किसी के खेत से 2 किलो फसल चुरा लेते है ज्यादा से ज्यादा कोई किसी को पाकेट मार लेते है ,पर देश की गर्दन नहीं काटते, इनकी वाणी में मिठास सुद्वता या शिष्टता नहीं होगी ,परंतु देश के एकता-आखंडता के खिलाफ़ जहर भी हो सकता है । आज देश के कार्यपालिका तथा न्यायपालिका तो उच्च शिक्षितों के हाथ में है ही विधायिका में भी काफी पढ़े-लिखे लोग आ चुके है । फिर बदहाली के लिये अशिक्षित लोगों को ही कैसे जिम्मेदार माना जा सकत‍ा है ? यदि उत्पाद लगातार खराब निकल रहे है तो उत्पाद बनाने वाली मसीनरी ( शिक्षा ) एवं उसके संचालक (शिक्षक एवं अन्य) को दोषरहित माना जा सकता है । आम आवाज शक्तिवर्धन अभियान"(AASHA) चलो आशा के साथ Ravi pal - (9761880779) Follow us on : FB: https://www.facebook.com/aashasangathan/ Google Plus: https://plus.google.com/+AashaSangathan Twitter: https://twitter.com/aashasangathan

क्या आपने कभी सोचा है ? - आशा संगठान

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क्या इस देश के नौजवान राजनीति के कूड़ेदान है ? हिन्दुस्तान की सरकारें नही चाहती कि किसी को अच्छी शिक्षा मिले? किसी को रोजगार मिले?
ग्रामीण भारत में 54% बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते है जिन स्कूलों की देख-रेख हिन्दुस्तान के राजनेता (मुखिया ,विधायक,सांसद,मंत्री और प्रधानमंत्री ) करते है । फिर इस देश के राजनेता अपनें बच्चों (आश्रितों ) को उस स्कूल में क्यों नहीं पढ़ाते ? जिन स्कूलों की वो खुद देख-रेख करते है ? इसका मतलब जो शिक्षा आप दूसरों को दे रहे है और खुद नहीं ले रहे है । इसका मतलब वो शिक्षा खराब है ।
 यदि आपको लगता है यह सवाल सही है तो  आप हमसे जुड़ सकते है ।
चलो आशा के साथ
आशा संगठान 
Ravi pal - (9761880779)
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