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Showing posts from December, 2017

भारतीय संविधान को छोटे-मोटे बैंडेज-पट्टी नहीं, बल्कि एक बड़ा सर्जरी की जरूरत है। - Aasha Sangathan

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हमेंबड़ाआश्चर्यहोताहैऔरसायदगर्वभी, किहमारेपासदुनियासबसेबड़ालिखितसंविधानहै, जिसेलिखनेमेंसिर्फदोसाल, ग्यारहमहीनाऔरअट्ठारहमहीनेंहीलगे।जबकिइतनाबड़ाकोईभीसोधग्रंथलिखनेमेंइससेकहींज्यादासमयलगताहै।दूसरीबातयहभी, किआख़िरहमदुनियाकासबसेबड़ासंविधानक्योंलिखेंऔरयहभी, कियदिहमारासंविधानदुनियाकासबसेबड़ाहैतोक्यायहइसदेशअंतिमव्यक्तिकेसाथपूरान्यायकरपाताहै???

दरअसल, आज़ादीप्राप्तकरनेकेबाद, देशकेबेहतरसंचालनहेतुतुरंतहमेंहमारेसंविधानकीआवश्यकताथी।आवश्यकतैयारीएवंसोध

आप किसके साथ है? - Ravi Pal

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नेताओं के मुद्दों के साथ या अपने मुद्दों के साथ?
        यदि आप धर्मनिरपेक्षता के साथ है तो कांग्रेस के साथ है। जबकि यदि आप राष्ट्रबादी है तो आप भाजपा के साथ है। समानता के पक्षधर है तो आप बामपंथी है। पिछड़े-दलितों के उत्थान के साथ है यानी सामाजिक न्याय के पक्षधर है तो आप समाजबादियों के साथ है।       अब जरा इसके विपरीत सोचिये, यदि कोई पार्टी साम्प्रदायिक (किसी पंथ विशेष के तरफ झुकाव) है तो क्या उनका राष्ट्रबाद सच्चा होगा? यदि किसी के लिये देश का स्थान उसके प्राथमिकता के सूची में नीचे कहीं है तो क्या वह सही मायने में धर्मनिरपेक्ष हो सकता है?

      यदि आप इन्ही सिद्धांत (किसी एक पक्ष के कारण) के साथ चले गए तो आप उसके अनुयायी हो गये, और पार्टियां बिल्कुल यही चाहती है। पार्टियां यही चाहती है कि आप सिर्फ़ उनके शब्दों को सुनें, समझें नहीं।       यदि भाजपा राष्ट्रबादी होता तो उसका pdp के गठबंधन न होता? कश्मीरी पंडित निर्वासित न होतें? कश्मीर समस्या, धारा 370 तथा समान नागरिक आचार संहिता ठंडे बस्ते में न होता? हिंदूवादी तथा सवर्णों के पार्टी होने के आरोप न लागतें?       यदि कांग्रेस धर्मनिरपेक्ष होता …

शिक्षा क्या है ? - Ravi Pal

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अगर पढ़ने -लिखने का हुनर ही शिक्षा है तो हमारी शिक्षा-प्रणाली सफल है ।

आजादी के बाद हमारी शिक्षा के बदौलत कितनो को नोबेल पुरुस्कार मिला है ?कितने वैज्ञानिक ,अर्थशास्त्री ,साहित्यकार, दार्शनिक ,व्यवसायी आदि ने हमारी शिक्षा के द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय पहचान बनायी है ?



उच्चतम शिक्षा की बात छोड़ भी तो क्या हमारी शिक्षा सामान्य स्तर की आर्थिक सुरक्षा ,सम्मान,बुद्धिमत्ता या जागरूकता की गारंटी देती है ?और कुछ नही तो क्या हमारी शिक्षा नौजवानों को अपराध वृति,देश विरोधी गतिविधियां या नैतिक पतन से भी रोक पाती है ?

क्या हम अपने 20-25 वर्षों के स्वर्णिम काल का सही निवेश कर रहे है ?

आम आवाज शक्तिवर्धन अभियान"(AASHA)  चलो आशा के साथ Ravi Pal - (9761880779) Visit - http://www.ravipal.org/
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आग लगा दो किताबों मे,जला दो विध्यालयों को।।

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सन् 1835 में लार्ड मैकाले ने ब्रिटिश संसद में दिये गये बयान में कहा था। कि भारत की साक्षरता 87% से 97% है । PTR भी 1950 में 20 विध्यार्थियों पर एक शिक्षक था।


आज विश्व साक्षरता 86% , जब कि भारत की साक्षरता 76% है , जब कि स्नातको की संख्या 8.15% है । PTR , सरकार द्वारा 30:1 निर्धारित है और देश के 70% तक विद्यालय इस म‍ानक में असफल है ।
दुनिया के top 500 यूनीवर्सिटीज में भारत के सिर्फ़ 3 यूनीवर्सिटी है ,वो भी top 275 के बाद । 90 % IIT,IIM,AIIMS के छात्र विदेश चले जाते है क्यों कि इन संस्थाओं का संचालन परोक्ष रुप से अमेरिका होता है । अमेरिका फण्ड के बहाने अपनी आवश्यकतानुसार पाठ्यक्रम बनवाते है ,ऐसा पाठ्यक्रम जिसका भारत में 80% तक कोई उपयोग नहीं है ,मतलव हमारे ये top के संस्थान विदेशों के लिये प्रतिभा तैयार करने की फैक्ट्री है ।
क्यों शिक्षा पर पैसे खर्च नहीं किये जाते?
हमरी गवर्नमेंट ने शिक्षा का बजट 4.15% से घटाकर 3.85% कर दिया है क्यों ? और बातें देश को विश्वगुरु बनाने की, की जा रहीं है ।
प्रतीत होता है , इस देश मे पढ़ना - लिखना जैसे कोई अपर‍ाध हो। शिक्षित बेरोजगारों की संख्या , अशिक्षि…