भारतीय संविधान को छोटे-मोटे बैंडेज-पट्टी नहीं, बल्कि एक बड़ा सर्जरी की जरूरत है। - Aasha Sangathan

      हमें बड़ा आश्चर्य होता है और सायद गर्व भी, कि हमारे पास दुनिया सबसे बड़ा लिखित संविधान है, जिसे लिखने में सिर्फ दो साल, ग्यारह महीना और अट्ठारह महीनें ही लगे। जबकि इतना बड़ा कोई भी सोध ग्रंथ लिखने में इससे कहीं ज्यादा समय लगता है। दूसरी बात यह भी, कि आख़िर हम दुनिया का सबसे बड़ा संविधान क्यों लिखें और यह भी, कि यदि हमारा संविधान दुनिया का सबसे बड़ा है तो क्या यह इस देश अंतिम व्यक्ति के साथ पूरा न्याय कर पाता है???


      दरअसल, आज़ादी प्राप्त करने के बाद, देश के बेहतर संचालन हेतु तुरंत हमें हमारे संविधान की आवश्यकता थी। आवश्यक तैयारी एवं सोध के लिये हमारे पास बहुत वक्त नहीं था। देश का बंटवारा हो चुका था, 565 रियासतों को एक करने की जिम्मेदारी सर पे था, साथ ही तमाम आपसी राजनैतिक चालों के बीच अंग्रेजों की रणनीति भी अपना काम कर ही रही थी। अतः ऐसे तमाम दबाबों के बीच अम्बेडर साहब ने बेहद जल्दीबाज़ी में संविधान तैयार कर दिया, जो दरअसल किसी मौलिक सोध पर आधारित हो कर अंग्रेजों द्वारा पारित Government of India Act 1858, Indian Councils Act 1861, Indian Councils Act 1892, Indian Councils Act 1909, Government of India Act 1919, Government of India Act 1935 and the Indian Independence Act 1947 एवं अन्य 34735 कानूनों पर आधारित है। इसीतरह संविधान के अन्य महत्वपूर्ण भाग भी हमनें अन्य देशों से कॉपी-पेस्ट कर लिये। सायद इसी कॉपी-पेस्ट के कारण हमारा संविधान, दुनियाँ का सबसे बड़ा संविधान बन गया, पर मौलिकता की गुणवत्ता का आभाव कमोबेश रह गया।
      तथ्यों की बात करें तो हमारे नेताओं ने हमारे देश को जितना लूटा है, उतना तो अंग्रेजों ने भी नही लूटा था। पर क्या हमारा संविधान किसी को सज़ा दे पाया, घोटाले की रकम वापस ले पाया??
     हम दुनियाँ के सबसे युवा और सबसे ज्यादा आवादी वाला देश है। हम प्राकृतिक रूप से (मौसम, कृषि एवं खनिज, सभी मामलों में) सभी देशों से समृद्ध है। लेकिन हम पूरी दुनीयाँ के लिये एक बाजार (ग्राहक) बन कर रह गए हैं। क्यों? क्योंकि हमारी शिक्षण-प्रशिक्षण ही बाज़ारबाद, गुलामी (नौकरी), बेरोजगारी आदि के लिये होता है, जो अंग्रेजों के इंडियन एजुकेशन एक्ट 1935 पर आधारित है।
     1857 के क्रांति के बाद, इंडियन पुलिस एक्ट 1860 भी हमें दबाने के लिये एवं शाषक वर्ग के सुरक्षा के लिये बने थे, वो आज भी चल रहे हैं।
     अनेकों कानून जिसपर हमारी व्यवस्था आधारित है, सबके सब अंग्रेजों के बनाये हुए हैं। जैसे: इंडियन पुलिस एक्ट 1860, ipc 1861, crpc 1861, इंडियन फारेस्ट एक्ट 1865, Land Acquisition Act of 1894 आदि। ये सबके सब कानून हमपे राज करने के लिये, हमारा शोषण करने के लिये या हमें लूटने के लिये बनाये गए थे। तो कहने को देशआज़ाद हो गया, लेकिन हमे गुलाम बनाने के सारे कानून आज भी चल रहे हैं।
     1953 में अम्बेडकर साहब नें स्वंय कहा था कि इस संविधान को आग लगा देना चाहिये। उनके अनुसार यह संविधान हमारे महान क्रांतिकारीयों के सपनों को पूरा नहीं करता है। हमारे संविधान में इस 70 वर्षों में 101 संसोधन हो चुके हैं, जो इसके कमी को इंगित करते हैं।
      परोक्ष रूप से हमारा संविधान अंग्रेजों का ही संविधान है, जिसके परिणामस्वरूप शासक वर्ग, शासितों को समान अधिकार एवं न्याय में फर्क पैदा कर देता है, क्योंकि अंग्रेजों द्वारा बनाये कानूनों में ऐसी अनेकों छिद्र की व्यवस्था की गई थी।
     सरकारें आती हैं, सरकारें जाती है, अपने मतलब कुछ कानूनों को हटा दिया जाता है या कुछ जोड़ दिया जाता है। हम 1947 से पहले भी मंदिर-मस्जिद, ब्राह्मण-हरिजन, असाम-पंजाब आदि का हिसाब करते थे, आज भी कर रहे हैं।

आशा संगठान  Aasha Shangathan
आम आवाज शक्तिवर्धन अभियान"(AASHA)
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