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Showing posts from January, 2018

एक सामाजिक-राजनैतिक सँगठन का निर्माण - Ravi Pal

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"आम आवाज़ शक्तिवर्धन अभियान" (AASHA) नाम से एक सामाजिक-राजनैतिक सँगठन का निर्माण किया जा रहा है। जिसका उद्देश्य सामाजिक-राजनैतिक बुराइयों को समाप्त कर एक समतामूलक देश का निर्माण करना है। ताकि हर एक भारतीये को सामान अवसर एवम् सम्मान मिल सके। राजनीती में अयोग्य तथा अपराधी प्रवॄति के व्यक्तियों का प्रवेश रोकना भी है ताकि सच्चे देशभक्त, समाजसेवी और योग्य लोगों को राजनीती आकर्षित कर सके। संगठन अपने अनेक कार्यक्रमों में से एक अति महवपूर्ण कार्यक्रम "शिक्षा में समानता" का सुभारम्भ करने जा रही है। जिसके अंतर्गत देशभर में सभी सरकारी अधिकारियों तथा राजनीतिज्ञों के आश्रितों को सरकारी विद्यालय में पढ़ना अनिवार्य कराना है।
संगठन विनम्रता पूर्वक देश के तमाम अधिकारियों एवम् राजनीतिज्ञों अर्थात सरकार से यह जानना चाहती है कि जो शिक्षा व्यवस्था के आप संचालक और व्यवस्थापक है, जिसे आप आम जनता के लिये उपयुक्त और प्रयाप्त समझते है वो आप अपने बच्चों को क्यू नही देते? क्यू आप अपने बच्चों के लिये निजी संस्थानों को प्राथमिकता देते हैं? क्या आप यह मानते हैं कि सरकारी शिक्षा या शिक्षा व्यवस्था…

जनता मूर्ख हो तो सफ़ेद भेड़िये लोकतांत्रिक व्यवस्था का चिर हरण हर चौक चैराहे पर करेंगें। - Ravi Pal

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लोकतंत्र में परिवारवाद एक गहरा काला धब्बा है। नेहरु-गांधी, लालू, मुलायम आदि एक तरफ तो हमारी मूर्खता का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहीं दूसरी तरफ यह दूसरे दर्जे के नेताओं के अयोग्यता एवं कुर्सी-लोलुपता को सिद्ध करता है।
उनका तर्क है कि उन्हें जनता चुनती है। सही है; जनता तो चुनती ही है उन्हें। क्योंकि जनता के अपने बेटे-बेटियाँ भीख मांगें, उन्हें मंजूर है, लेकिन उनके जात/धर्म के आकाओं के बच्चों को तो राजगद्दी चाहिये ही। समस्या सिर्फ़ जात/धर्म तक ही सीमित नही है, असल समस्या हमारा व्यक्तिपूजक होना भी है। हम तो एक गांधी शब्द से ऐसे चिपक गये उससे 70 साल बाद भी नही निकल पाये। कई लोगों का यह भी तर्क है कि जब डॉक्टर के संतान डॉक्टर हो सकते हैं, अभिनेताओं के संतान अभिनेता हो सकते हैं तो राजनेताओं के बच्चे राजनेता क्यों नहीं? क्योंकि उनमें यदि प्रतिभा न होगा तो उनका व्यवसाय/प्रोफेशन को नुकसान होगा पर यदि राजनेता अयोग्य हुये तो नुकसान सवा सौ करोड़ जनता का होगा। परंतु एक और अहम सवाल है कि क्या पूरी कांग्रेस पार्टी में राहुल गांधी से ज्यादा योग्य कोई दूसरा नहीं है? क्या राजद में सबसे योग्य तेज/तेजस्वी ही…

सेवा, शक्तिवर्धन एवं सुधार।

जी हाँ, यहीं संगठन के मुख्य उद्देश्य होंगे। हम अगले तीन पोस्ट के जरिये इन तीनों विन्दुओं पर चर्चा करेंगे। आज बात करंगें: 'सेवा' पर। आप जानते हैं, हमारे देश ऐसे करोड़ो लोग, जिनको दोनों वक्त भोजन तक नहीं मिल पाता, मौसम के प्रहार से बचने के कपड़ें भी नही है, उनके लिये सामान्य दवाएं तथा चिकित्सक तक उपलब्ध नहीं है, इत्यादि। इनमें से कुछ लोग मजदूरी (अनियमित) करते हैं, कुछ लोग फुटपाथ पे, बसों-ट्रेनों आदि में कुछ बेचते हैं, रिक्सा-ठेला खिंचते हैं तथा कुछ तो भीख भी मांगते हैं। इन असहायों, अनाथों, विकलांगों, निःसंतानों आदि की संख्या 20 करोड़ से भी ज्यादा है। संगठन का पहला उद्देश्य ऐसे लोगों की सेवा/मदद करना है। इनके लिये भोजन, वस्त्र, चिकित्सा आदि, विकलांगों के लिये बैसाखी, व्हीलचेयर, तथा कमज़ोर नज़र वालों के लिये चश्मा, दवाएं आदि के साथ-साथ इनके लिये मजदूरी करने के औजार और सूक्ष्म व्यवसाय के लिये आवश्यक सामग्री की व्यवस्था करने का प्रयास करेगी। हाँ, यह इन वर्गों के लिये उपर्युक्त व्यवस्थाओं पर चिंतन करते समय मुझे यह ख्याल आया रहा था कि यदि किसी को कुछ वक्त का भोजन, वर्ष में दो बार वस्त्र या एक …

जनता मूर्ख हो तो सफ़ेद भेड़िये लोकतांत्रिक व्यवस्था का चिर हरण हर चौक चैराहे पर करेंगें। - Aasha Sangathan

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लोकतंत्र में परिवारवाद एक गहरा काला धब्बा है।   नेहरु-गांधी, लालू, मुलायम आदि एक तरफ तो हमारी मूर्खता का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहीं दूसरी तरफ यह दूसरे दर्जे के नेताओं के अयोग्यता एवं कुर्सी-लोलुपता को सिद्ध करता है।
   उनका तर्क है कि उन्हें जनता चुनती है। सही है; जनता तो चुनती ही है उन्हें। क्योंकि जनता के अपने बेटे-बेटियाँ भीख मांगें, उन्हें मंजूर है, लेकिन उनके जात/धर्म के आकाओं के बच्चों को तो राजगद्दी चाहिये ही। समस्या सिर्फ़ जात/धर्म तक ही सीमित नही है, असल समस्या हमारा व्यक्तिपूजक होना भी है। हम तो एक गांधी शब्द से ऐसे चिपक गये उससे 70 साल बाद भी नही निकल पाये। कई लोगों का यह भी तर्क है कि जब डॉक्टर के संतान डॉक्टर हो सकते हैं, अभिनेताओं के संतान अभिनेता हो सकते हैं तो राजनेताओं के बच्चे राजनेता क्यों नहीं? क्योंकि उनमें यदि प्रतिभा न होगा तो उनका व्यवसाय/प्रोफेशन को नुकसान होगा पर यदि राजनेता अयोग्य हुये तो नुकसान सवा सौ करोड़ जनता का होगा।    परंतु एक और अहम सवाल है कि क्या पूरी कांग्रेस पार्टी में राहुल गांधी से ज्यादा योग्य कोई दूसरा नहीं है? क्या राजद में सबसे योग्य तेज/तेजस्व…