सेवा, शक्तिवर्धन एवं सुधार।

जी हाँ, यहीं संगठन के मुख्य उद्देश्य होंगे। हम अगले तीन पोस्ट के जरिये इन तीनों विन्दुओं पर चर्चा करेंगे।
आज बात करंगें: 'सेवा' पर।
आप जानते हैं, हमारे देश ऐसे करोड़ो लोग, जिनको दोनों वक्त भोजन तक नहीं मिल पाता, मौसम के प्रहार से बचने के कपड़ें भी नही है, उनके लिये सामान्य दवाएं तथा चिकित्सक तक उपलब्ध नहीं है, इत्यादि। इनमें से कुछ लोग मजदूरी (अनियमित) करते हैं, कुछ लोग फुटपाथ पे, बसों-ट्रेनों आदि में कुछ बेचते हैं, रिक्सा-ठेला खिंचते हैं तथा कुछ तो भीख भी मांगते हैं। इन असहायों, अनाथों, विकलांगों, निःसंतानों आदि की संख्या 20 करोड़ से भी ज्यादा है।
संगठन का पहला उद्देश्य ऐसे लोगों की सेवा/मदद करना है। इनके लिये भोजन, वस्त्र, चिकित्सा आदि, विकलांगों के लिये बैसाखी, व्हीलचेयर, तथा कमज़ोर नज़र वालों के लिये चश्मा, दवाएं आदि के साथ-साथ इनके लिये मजदूरी करने के औजार और सूक्ष्म व्यवसाय के लिये आवश्यक सामग्री की व्यवस्था करने का प्रयास करेगी।
हाँ, यह इन वर्गों के लिये उपर्युक्त व्यवस्थाओं पर चिंतन करते समय मुझे यह ख्याल आया रहा था कि यदि किसी को कुछ वक्त का भोजन, वर्ष में दो बार वस्त्र या एक बार चिकित्सीय सुविधाओं की व्यवस्था कर देने भर उनका जीवन सुखमय हो जायेगा या हम कुछ लोगों के द्वारा आखिर कितनों की मदद की जा सकती हैं और फ़िर क्या इसका मतलब यह समझा जायेगा कि यह सब बस वाहवाही लूटने का एक कार्यक्रम भर है? मुझे इन सवालों के एकदम स्पष्ट जबाब तो नही मालूम है, लेकिन इस कार्यक्रम को देरी से क्रियान्वयन का कारण भी यही है। हो सकें तो आप महानुभाव अपने ज्ञान एवं अनुभव से हमारा मार्गदर्शन करें।
यह भी बताएं कि तब क्या किया जाये, जब दिन-प्रतिदिन ऐसे असहाय, बीमार या अभिषाप्तों से आपका सामना होता है? क्या हम कुछ नहीं कर सकते उनकी लाचारी पे?

आशा संगठान  Aasha Shangathan
आम आवाज शक्तिवर्धन अभियान"(AASHA)
चलो आशा के सा
Ravi pal - (9761880779)

Follow Us On 

Popular posts from this blog

आखिर ऐसा क्यों ? एक समान और उपयोगी शिक्षण -प्रशिक्षण क्यों ? - आशा संगठान

राजनेताओं गन्दी राजनीति करना बन्द करों

हमारा कोई मक्सद नहीं था। कि इस अभियान को शुरू किया जाये । क्यों जरूरत पड़ गयी इस अभियान को शुरू करने की?