जनता मूर्ख हो तो सफ़ेद भेड़िये लोकतांत्रिक व्यवस्था का चिर हरण हर चौक चैराहे पर करेंगें। - Ravi Pal

लोकतंत्र में परिवारवाद एक गहरा काला धब्बा है।
नेहरु-गांधी, लालू, मुलायम आदि एक तरफ तो हमारी मूर्खता का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहीं दूसरी तरफ यह दूसरे दर्जे के नेताओं के अयोग्यता एवं कुर्सी-लोलुपता को सिद्ध करता है।

उनका तर्क है कि उन्हें जनता चुनती है। सही है; जनता तो चुनती ही है उन्हें। क्योंकि जनता के अपने बेटे-बेटियाँ भीख मांगें, उन्हें मंजूर है, लेकिन उनके जात/धर्म के आकाओं के बच्चों को तो राजगद्दी चाहिये ही। समस्या सिर्फ़ जात/धर्म तक ही सीमित नही है, असल समस्या हमारा व्यक्तिपूजक होना भी है। हम तो एक गांधी शब्द से ऐसे चिपक गये उससे 70 साल बाद भी नही निकल पाये। कई लोगों का यह भी तर्क है कि जब डॉक्टर के संतान डॉक्टर हो सकते हैं, अभिनेताओं के संतान अभिनेता हो सकते हैं तो राजनेताओं के बच्चे राजनेता क्यों नहीं? क्योंकि उनमें यदि प्रतिभा न होगा तो उनका व्यवसाय/प्रोफेशन को नुकसान होगा पर यदि राजनेता अयोग्य हुये तो नुकसान सवा सौ करोड़ जनता का होगा।
परंतु एक और अहम सवाल है कि क्या पूरी कांग्रेस पार्टी में राहुल गांधी से ज्यादा योग्य कोई दूसरा नहीं है? क्या राजद में सबसे योग्य तेज/तेजस्वी ही है? यदि हाँ तो बाकी नेताओं की योग्यता क्या होगी, आप समझ सकते हैं। यदि नहीं तो बाकी नेतागण इनकी नेतृत्व क्यों स्वीकार करते हैं? क्योंकि वहां एक आपसी समझ काम कर रही है कि प्रसाद खाने के लिये मंदिर (दल) का रहना आवश्यक है। उन्हें पता होता है कि जनता की अंधभक्ति उनके नेतृत्व के साथ है, उनके साथ नहीं।
देश की आज़ादी एवं निर्माण के नींव में कांग्रेस के योगदानों को बेशक रेखांकित किया जाना चाहिए। परंतु इसका मतलब यह नही होता कि देश उनकी ख़ानदानी सम्प्पति हो गई। इसी प्रकार लालू सामाजिक न्याय के वाहक हो सकते हैं; जिसके लिए उन्हें भरपूर पद-प्रतिष्ठा भी दिया गया। परंतु..?
आशा संगठान Aasha Shangathan
आम आवाज शक्तिवर्धन अभियान"(AASHA)
चलो आशा के साथ
Ravi pal - (9761880779)
Follow Us On

Popular posts from this blog

आखिर ऐसा क्यों ? एक समान और उपयोगी शिक्षण -प्रशिक्षण क्यों ? - आशा संगठान

राजनेताओं गन्दी राजनीति करना बन्द करों

हमारा कोई मक्सद नहीं था। कि इस अभियान को शुरू किया जाये । क्यों जरूरत पड़ गयी इस अभियान को शुरू करने की?