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भारतीय लोकशाही मे शाही तो है परन्तु लोक नही है समाज दो हिस्सो मे बटा हुआ है यूं कहें एक शासक दूसरा शोसित। सवैधानिक रूप से भारत मे सभी नागरिकों को समान कर्तव्य और अधिकार प्राप्त है , ब्यवहारिक मे ऐसा नहीं है
        बात चाहे शिक्षा की हो,स्वास्थ की हो,या यहाँ तक की न्याय ब्यवस्था की हो ऐसा प्रतीत होता है आम और खास के लिये अलग-अलग ब्यवस्थायें काम कर रहीं है

          तो वो आवाज जो दबा दी जाती है वे अधिकार जो दिये नहीं जा रहे है , वे ब्यवस्थायें जो आम और खास को नजरों से देखती है, . . . . . आदि समस्यायें जो सरकार द्वारा लिये गये गलत निर्णय और नीति के कारण उत्पन्न हुयी है के स्थाई समाधान की कोशिश का नाम आशा है
( रवि पाल )
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